हनुमान की आशा भरी बड़ी छलांग

जब प्यारे हनुमान जी को अपनी छुपी हुई शक्ति याद आती है, तो वे राजकुमारी सीता तक प्रेम और आशा का संदेश पहुँचाने के लिए विशाल समुद्र को एक छलांग में पार कर जाते हैं।

उम्र 5-7

वीर हनुमान और उनके प्यारे वानर मित्र चमचमाते नीले समुद्र के किनारे खड़े थे। सुनहरी रेत पर समुद्र की लहरें धीरे-धीरे आ रही थीं। सामने सागर दूर-दूर तक फैला हुआ था। सब सोच रहे थे कि इतने विशाल समुद्र को भला कौन पार कर पाएगा! हनुमान जी ने अपनी आँखें बंद कीं और गहरी साँस ली। उनका मन प्यार और शांत साहस से भर गया।

अचानक, हनुमान जी को अपनी अद्भुत शक्ति याद आ गई! उन्होंने रेत पर पैर जमाए और ख़ुशी से छलांग लगाई। वे ऊपर चमकते आसमान में उड़ चले। वे गुलाबी बादलों और चहकती चिड़ियों के पार निकल गए। हनुमान जी हवा में आराम से तैर रहे थे। नीचे समुद्र तारों की चादर जैसा जगमगा रहा था।

हनुमान जी बिना आहट किए लंका के हरे-भरे द्वीप पर उतर गए। उन्होंने खुद को एक नन्हीं, प्यारी बिल्ली जितना छोटा बना लिया। बगीचों में रंग-बिरंगे फूल और सरसराते पेड़ थे। वे वहाँ दबे पाँव चलने लगे। हनुमान जी ने हर झाड़ी के पीछे ध्यान से देखा। वे बस सीता जी को सही-सलामत पाना चाहते थे।

अशोक वाटिका के शांत बगीचे में हनुमान जी पहुँचे। वहाँ एक बड़े छायादार पेड़ के नीचे सीता जी बैठी थीं। वे धीरे से आगे बढ़े और आदर से सिर झुकाया। उन्होंने भगवान राम की चमकती अँगूठी उनके सामने रख दी। सीता जी ने अँगूठी देखी। उनका चेहरा प्यारी मुस्कान से खिल उठा। उनका दिल अपार ख़ुशी और आशा से भर गया।

प्रसन्न मन से हनुमान जी ने फिर प्रणाम किया। उन्होंने शाम के सुहावने आसमान में छलांग लगा दी। वे चाँदनी से चमकते समुद्र के ऊपर उड़ने लगे। वे श्री राम को यह शुभ समाचार सुनाने को आतुर थे। समुद्र के उस पार श्री राम इंतज़ार कर रहे थे। वे अपने वीर मित्र का मुस्कुराकर स्वागत करने को तैयार थे। चारों ओर सब कुछ शांत, सुरक्षित और सुखद था।

दिल में सच्चा साहस और प्रेम रखो। फिर आशा पहुँचाने के लिए कोई भी दूरी बड़ी नहीं होती।

इस कहानी के बारे में

स्रोतः: रामायण की एक पावन कथा

hanuman उम्र 5-7

बंदना

ॐ हनुमते नमो नमः
om hanumate namo namah

EnglishO Hanuman, brave heart and devoted friend of Rama — we bow to you again and again.

नेपालीहे हनुमान — हामी तपाईंलाई बारम्बार नमस्कार गर्छौं।

हिन्दीहे हनुमान — हम आपको बार-बार नमस्कार करते हैं।

श्लोक

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् । वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥
manojavaṃ mārutatulyavegaṃ jitendriyaṃ buddhimatāṃ variṣṭham, vātātmajaṃ vānarayūthamukhyaṃ śrīrāmadūtaṃ śaraṇaṃ prapadye
मन जैसे वेगवान, वायु के समान तेज़, अपनी इंद्रियों को जीतने वाले, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ; पवनपुत्र, वानरों के मुखिया, श्रीराम के दूत — मैं उनकी शरण लेता हूँ।
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