जब हनुमान राजकुमार राम से मिले
जब राजकुमार राम शांत जंगल में माता सीता की खोज कर रहे थे, तब उनकी मुलाकात दयालु और भक्ति से भरे हनुमान से हुई, और वहीं से शुरू हुई उनकी अद्भुत और आजीवन मित्रता।
राजकुमार राम और भाई लक्ष्मण शांत वन में आगे बढ़ रहे थे। लंबी यात्रा से दोनों थके थे और माता सीता को खोज रहे थे। जल्द ही वे सुंदर ऋष्यमूक पर्वत के पास पहुँचे। शाम की धीमी हवा में पेड़ झूम रहे थे। ढलते सूरज ने आसमान को सुनहरे रंगों से सजा दिया था।
ऊँची डाल पर बैठे हनुमान जी ने नीचे दो सुंदर यात्रियों को देखा। वे एक वीर, चतुर और अत्यंत दयालु वानर थे। मेहमानों के स्वागत के लिए वे पंख की तरह हल्के से नीचे आए। फिर उन्होंने मीठी वाणी में दोनों का परिचय पूछा और स्वागत किया।
राजकुमार राम का नाम सुनते ही हनुमान जी का मन आनंद से भर गया। वे तुरंत जान गए कि ये ही उनके प्यारे प्रभु हैं। हनुमान जी ने हाथ जोड़कर बड़े आदर से प्रणाम किया। तब राम जी मुस्कुराए और भाई की तरह उन्हें गले लगा लिया।
हनुमान जी बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने दोनों भाइयों को पर्वत पर ले जाने की विनती की। बड़े प्यार से उन्होंने राम और लक्ष्मण को अपने कंधों पर बैठाया। फिर वे हवा में उड़ते हुए सुग्रीव जी के पास पहुँचे। सभी वानर मित्रों ने सीता जी को खोजने में मदद का वचन दिया।
रात के आसमान में तारे टिमटिमाने लगे। हनुमान जी बड़े चाव से राम जी के पास बैठ गए। दोनों की सुंदर मित्रता ने रात को उम्मीद से भर दिया। राम जी जान गए कि अब वे कभी अकेले नहीं रहेंगे। पूरा जंगल चाँद की मीठी रोशनी में चैन से सो रहा था।
सच्चे मित्र जीवन में उजाला लाते हैं। वे प्रेम और भक्ति से हमारा साथ देते हैं।
इस कहानी के बारे में
स्रोतः: वाल्मीकि रामायण की कथा पर आधारित
बंदना
EnglishO Hanuman, brave heart and devoted friend of Rama — we bow to you again and again.
नेपालीहे हनुमान — हामी तपाईंलाई बारम्बार नमस्कार गर्छौं।
हिन्दीहे हनुमान — हम आपको बार-बार नमस्कार करते हैं।