राम और दस सिर वाला राजा

लंका का घमंडी, दस सिर वाला राजा रावण किसी की नहीं सुनता था। पर श्रीराम, उनके दोस्तों और वानर सेना ने दिखाया कि सच्चा और दयालु दिल ही जीतता है।

उम्र 5-7

समुद्र के उस पार, सोने की लंका में राजा रावण रहता था। लोग कहते थे कि उसके दस सिर हैं। वो बहुत होशियार था, मानो उसके दसों सिर नई बातों से भरे हों। पर वो बहुत घमंडी भी था, और किसी की बात नहीं सुनता था।

एक दिन घमंड में आकर रावण ने बहुत ग़लत काम किया। वो सीता माँ को दूर लंका के अपने बग़ीचे में ले गया। सीता माँ फूलों वाले पेड़ के नीचे शांत बैठी रहीं। वे आसमान की ओर देखती रहीं। "श्रीराम ज़रूर आएँगे," उन्होंने कहा, "मुझे पूरा भरोसा है।"

श्रीराम को सीता माँ की बहुत याद आई। पर वे अकेले नहीं थे। भाई लक्ष्मण और प्यारे दोस्त हनुमान उनके साथ थे। बंदरों और भालुओं की पूरी वानर सेना भी मदद को आ गई। सबने हाथों-हाथ पत्थर पहुँचाए, और मिलकर समुद्र पर पुल बना दिया।

श्रीराम लंका के सुनहरे द्वार पर पहुँचे। उन्होंने प्यार से कहा, "सीता को आदर से घर लौटने दो।" उन्होंने बार-बार समझाया। पर रावण ने हाथ बाँध लिए और अपनी दसों नाकें ऊपर चढ़ा लीं। वो नहीं माना।

आख़िर में सच्चाई जीती, जैसे वो हमेशा जीतती है। रावण का घमंड सच्चे और दयालु दिल के आगे नहीं टिक पाया। सीता माँ श्रीराम के पास लौट आईं। चारों ओर प्यारी, सुखद रोशनी और ख़ुशियाँ फैल गईं।

जीत का वही दिन विजयादशमी है। भारत में दशहरे पर परिवार आतिशबाज़ी के बीच रावण का बड़ा पुतला जलता देखते हैं। नेपाल में दशैं पर बच्चे टीका लगवाते हैं। वे पतंग उड़ाते हैं और बाँस के झूलों पर झूलते हैं। घमंड कितना भी बड़ा हो, सच्चाई और दयालु दिल की ही जीत होती है।

घमंड कितना भी बड़ा हो, सच्चाई और दोस्ती की हमेशा जीत होती है।

इस कहानी के बारे में

बालकथा की मौलिक कहानी।

rama उम्र 5-7

बंदना

श्री राम जय राम जय जय राम
sri ram jai ram jai jai ram

EnglishVictory to Rama, victory, victory to Rama!

नेपालीरामको जय होस्, जय, रामकै जय!

हिन्दीराम की जय, जय, राम की ही जय!

श्लोक

श्रीराम राम रामेति रमे रामे मनोरमे । सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥
śrīrāma rāma rāmeti rame rāme manorame, sahasranāma tattulyaṃ rāmanāma varānane
राम, राम, राम — कहते जाने से मन शांत और प्रसन्न होता है। एक ही नाम, पर हज़ार नामों जितना समेटे हुए।
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