बाल राम और वन का आश्रम
आइए, नन्हे राजकुमारों राम और लक्ष्मण के साथ ऋषि विश्वामित्र के संग जंगल में चलें और एक शांत आश्रम की रक्षा करें।
ज्ञानी ऋषि विश्वामित्र राजमहल पधारे। उन्होंने बालक राजकुमार राम और उनके भाई लक्ष्मण से मदद माँगी। उन्हें अपने शांत आश्रम की रक्षा के लिए वीर राजकुमार चाहिए थे। श्री राम प्यार से मुस्कुराए, और मदद के लिए तैयार हो गए।
दोनों छोटे भाई अपने गुरु के साथ हरे-भरे जंगल में आगे बढ़े। ऋषि विश्वामित्र ने उन्हें प्रकृति, तारों और पवित्र मंत्रों के बारे में सिखाया। राम ने हर बात बहुत ध्यान से सुनी। लक्ष्मण हमेशा अपने प्यारे भाई के पास रहकर उनकी देखभाल करते रहे।
जल्द ही, वे सुंदर वन-आश्रम में पहुँच गए। नन्हे हिरण घास पर फुदकते हुए आए। रंग-बिरंगी चिड़ियों ने मीठे गीत गाए। आश्रम के ऋषियों ने मुस्कुराकर नन्हे राजकुमारों का स्वागत किया। राम ने बड़े आदर से सभी को प्रणाम किया।
काले बादलों और तेज़ आवाज़ों ने यज्ञ में बाधा डाली। तभी वीर राम निडर होकर आगे आए। उन्होंने शांत मन और सधे हाथों से अपना धनुष उठाया। लक्ष्मण भी मदद के लिए पास आ खड़े हुए। दोनों भाइयों ने मिलकर बड़े साहस से आश्रम की रक्षा की।
जंगल फिर से शांत, सुरक्षित और खुशहाल हो गया। ऋषि विश्वामित्र ने गर्व से दोनों नन्हे वीरों को देखा। उन्होंने राम और लक्ष्मण को उनकी दया और वीरता के लिए आशीर्वाद दिया। जंगल के सभी जानवर खुश हो गए। पूरे आश्रम में सुनहरी धूप खिल उठी।
साहस और दया से अपना कर्तव्य निभाने पर, चारों तरफ शांति और खुशी फैलती है।
इस कहानी के बारे में
स्रोतः: महर्षि वाल्मीकि रामायण पर आधारित कथा
बंदना
EnglishVictory to Rama, victory, victory to Rama!
नेपालीरामको जय होस्, जय, रामकै जय!
हिन्दीराम की जय, जय, राम की ही जय!