सुनहरा हिरण

धूप से खिले एक शांत जंगल में, एक जादुई सुनहरा हिरण राजकुमार राम को प्रेम, समझदारी और साहस से भरी एक यात्रा पर ले जाता है।

उम्र 5-7

एक शांत और हरे-भरे जंगल में राजकुमार राम, सीता जी और लक्ष्मण ख़ुशी-ख़ुशी रहते थे। धूप खिली एक दोपहर, सीता जी ने पेड़ों के बीच कुछ अनोखा देखा। वह एक प्यारा हिरण था, जो सोने की तरह जगमगा रहा था। सीता जी मुस्कुराईं। उन्होंने राम जी से उस नन्हें हिरण को कुटिया के पास लाने को कहा।

राजकुमार राम सीता जी को ख़ुश करना चाहते थे। वे उस हिरण को ढूँढ़ने जंगल में गए। उन्होंने लक्ष्मण से कुटिया के पास रहने को कहा, ताकि सीता जी सुरक्षित रहें। लक्ष्मण प्यार से मुस्कुराए और पहरा देने लगे। राम जी धीरे-धीरे आगे बढ़े और सुनहरी चमक के पीछे चलने लगे।

जंगल में वह सुनहरा हिरण फूलों के बीच उछल-कूद कर रहा था। असल में वह सचमुच का हिरण नहीं था। वह तो मारीच का बनाया एक जादुई छलावा था! मारीच को चमकती चीज़ें बनकर सबको भरमाना पसंद था। राम जी ने ध्यान से देखा। वे समझ गए कि यह हिरण बस रोशनी का बना एक रूप है।

जब राम जी दूर थे, भेस बदलकर आए एक मेहमान ने सीता जी को सोने के उड़ते रथ में बैठा लिया। वह रथ शांत आसमान में बादलों के पार उड़ चला। पेड़ की ऊँची डाल पर बैठे साहसी पक्षी जटायु ने यह सब देखा।

राम जी लौटे, तो सीता जी वहाँ नहीं थीं। उन्होंने प्यार से लक्ष्मण का हाथ थामा। दोनों जानते थे कि सीता जी को ढूँढ़ने के लिए हिम्मत और समझदारी चाहिए। दिल में साहस लिए, दोनों भाई रास्ते पर चल पड़े। वे मुस्कुराए और प्रेम भरी नई यात्रा के लिए तैयार हो गए।

दिल में प्यार और कदमों में हिम्मत हो, तो परिवार हमेशा साथ निभाता है।

इस कहानी के बारे में

स्रोतः: रामायण की एक कहानी पर आधारित

rama उम्र 5-7

बंदना

श्री राम जय राम जय जय राम
sri ram jai ram jai jai ram

EnglishVictory to Rama, victory, victory to Rama!

नेपालीरामको जय होस्, जय, रामकै जय!

हिन्दीराम की जय, जय, राम की ही जय!

श्लोक

श्रीराम राम रामेति रमे रामे मनोरमे । सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥
śrīrāma rāma rāmeti rame rāme manorame, sahasranāma tattulyaṃ rāmanāma varānane
राम, राम, राम — कहते जाने से मन शांत और प्रसन्न होता है। एक ही नाम, पर हज़ार नामों जितना समेटे हुए।
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