छोटी गिलहरी का बड़ा दिल

आइए, एक प्यारी-सी गिलहरी से मिलिए जो भगवान श्रीराम और पवनपुत्र हनुमान जी की नीले समुद्र पर पुल बनाने में मदद करना चाहती है। जानिए कैसे प्रेम से किया गया छोटा-सा काम भी कितना बड़ा और खास बन जाता है!

उम्र 5-7

चमकते हुए नीले समुद्र के किनारे, सब लोग बड़े उत्साह से काम कर रहे थे! बलशाली हनुमान जी और उनके शक्तिशाली मित्र भगवान श्रीराम के लिए पुल बनाने हेतु बड़ी-बड़ी चट्टानें उठा रहे थे। हर कोई किसी न किसी तरह मदद करना चाहता था। नारियल के ऊँचे पेड़ पर बैठी एक नन्हीं-सी धारीदार गिलहरी अपनी बड़ी-बड़ी चमकीली आँखों से यह सब देख रही थी।

नन्हीं गिलहरी ने सोचा, 'मैं भी भगवान श्रीराम की मदद करना चाहती हूँ!' लेकिन वह भारी पत्थर उठाने के लिए बहुत छोटी थी। तभी उसे एक प्यारा और समझदारी भरा उपाय सूझा! उसने ठंडे पानी में डुबकी लगाई, सुनहरी रेत में ख़ुशी से लोट लगाई और दौड़कर सीधे पुल की तरफ़ भाग चली।

गिलहरी ने ख़ुशी से अपने शरीर को झटका और बड़े-बड़े पत्थरों के बीच की दरारों में रेत के नन्हे कण भर दिए। 'मेरी रेत इन बड़े पत्थरों को जोड़कर रखेगी!' उसने गर्व से कहा। कुछ बड़े बंदरों को यह देखकर हँसी आ गई, लेकिन हनुमान जी नन्हीं दोस्त की सच्ची लगन देखकर धीरे से मुस्कुराए।

भगवान श्रीराम एक प्यारी और मंद मुस्कान के साथ यह सब देख रहे थे। वे धीरे-धीरे आगे बढ़े और उस मेहनती नन्हीं गिलहरी को अपनी दुलार भरी हथेली पर उठा लिया। हनुमान जी भी श्रद्धा से पास आ खड़े हुए। भगवान श्रीराम ने उस नन्हे जीव को उसके बड़े और प्यारे दिल के लिए धन्यवाद दिया।

बड़े प्यार से, भगवान श्रीराम ने अपनी तीन उँगलियाँ गिलहरी की पीठ पर सहलाईं। और देखिए, क्या चमत्कार हुआ! एक विशेष आशीर्वाद के रूप में उसकी नरम पीठ पर तीन सुंदर चाँदी जैसी धारियाँ उभर आईं। नन्हीं गिलहरी ख़ुशी से चहक उठी, यह जानकर कि प्यार से किया गया कोई भी काम कभी छोटा नहीं होता।

जब कोई काम सच्चे दिल और प्यार से किया जाता है, तो वह कभी छोटा नहीं होता।

इस कहानी के बारे में

स्रोतः: रामायण की एक सुंदर कथा

rama उम्र 5-7

बंदना

श्री राम जय राम जय जय राम
sri ram jai ram jai jai ram

EnglishVictory to Rama, victory, victory to Rama!

नेपालीरामको जय होस्, जय, रामकै जय!

हिन्दीराम की जय, जय, राम की ही जय!

श्लोक

श्रीराम राम रामेति रमे रामे मनोरमे । सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥
śrīrāma rāma rāmeti rame rāme manorame, sahasranāma tattulyaṃ rāmanāma varānane
राम, राम, राम — कहते जाने से मन शांत और प्रसन्न होता है। एक ही नाम, पर हज़ार नामों जितना समेटे हुए।
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