मित्रता का तैरता हुआ पुल
जब राजकुमार राम को विशाल नीले समुद्र को पार करना था, तब बंदरों और भालुओं की एक खुशमिज़ाज सेना ने मिलकर पत्थरों का एक अद्भुत तैरता हुआ पुल बनाया।
राजकुमार राम अपने वीर मित्र हनुमान के साथ सुनहरी रेत पर खड़े थे। उनके पीछे नटखट बंदरों और बलवान भालुओं की प्यारी सेना थी। दूर-दूर तक बस विशाल नीला समुद्र फैला था। वे इतने बड़े समुद्र को पार करके लंका कैसे पहुँचेंगे? राम जी शांत भाव से मुस्कुराए। उन्हें पूरा भरोसा था कि सब मिलकर रास्ता ढूँढ लेंगे।
बलवान भालुओं ने बड़ी-बड़ी चट्टानें उठाईं। खुशहाल बंदरों ने छोटे-छोटे पत्थर उठाए। सबने प्यार से हर पत्थर पर राजकुमार राम का नाम लिखा। हनुमान जी ने एक भारी चट्टान उठाई और पानी में रख दी। छपाक! वह भारी चट्टान ज़रा भी नहीं डूबी। वह लहरों पर लकड़ी की नन्ही नाव की तरह तैरने लगी।
कोई भी अकेला यह रास्ता नहीं बना सकता था। मिलकर सब एक अनोखी टोली बन गए। एक नन्ही गिलहरी भी रेत में लोटने लगी। वह दरारें भरने के लिए रेत के नन्हे कण ले आई। पत्थर दर पत्थर, चमकते समुद्र पर तैरता पुल लंबा और मज़बूत होता गया। जब रास्ता दूसरे किनारे पहुँच गया, तो सबने खुशी से तालियाँ बजाईं।
हर्ष और उमंग के साथ पूरी सेना उस चमत्कारी पुल पर चल पड़ी। हनुमान जी हाथ जोड़े आदर से राम जी के साथ आगे बढ़े। समुद्र की शांत लहरें भी हौले-हौले झूम रही थीं। कदम दर कदम, उनके सच्चे विश्वास ने उन्हें सुरक्षित पार पहुँचा दिया।
साहस और दया से राजकुमार राम ने जीत पाई। उन्होंने प्यार से सीता जी का स्वागत किया। दोनों तारों से सजे आसमान तले हाथ थामे खड़े रहे। थके हुए बंदर और भालू मीठी चाँदनी में आराम करने लगे। उन्हें अपने बनाए पुल पर बड़ा गर्व था। अब प्यार भरे मन से सोने का समय आ गया था।
प्रेम और विश्वास से मिलकर हम बड़े काम कर सकते हैं। ऐसे काम, जो कोई अकेला नहीं कर सकता।
इस कहानी के बारे में
स्रोतः: रामायण की एक पावन कथा से पुनर्कथित
बंदना
EnglishVictory to Rama, victory, victory to Rama!
नेपालीरामको जय होस्, जय, रामकै जय!
हिन्दीराम की जय, जय, राम की ही जय!