लंका में हनुमानजी की नटखट शरारतें

लंका में माता सीता की खोज के बाद, चतुर हनुमानजी ने राजा रावण को एक मज़ेदार सीख देने का मन बनाया। अपनी तेज़ बुद्धि और जादुई लंबी पूँछ के साथ, इस नटखट वीर ने सोने की नगरी में सब के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी।

उम्र 5-7

शांत अशोक वाटिका में, नन्हे हनुमानजी ने माता सीता को प्रणाम किया। उन्हें सकुशल देखकर हनुमानजी खुशी से झूम उठे। अब वे राजा रावण को दिखाना चाहते थे। वीर राजकुमार राम के मित्र कितने चतुर हैं! हनुमानजी सीना फुलाकर धीरे से मुस्कुराए। अब कुछ मज़ेदार शरारतें करने का समय आ गया था!

हनुमानजी ने फलों के ऊंचे पेड़ों पर लंबी छलांग लगाई। डालियों को हिलाते ही मीठे-मीठे आमों की बारिश होने लगी। सोए पहरेदारों के टोपों पर आम गिरे, तो वे चौंक पड़े। हनुमानजी ने उनके पैरों में गुदगुदी की और फुर्र हो गए! पहरेदार हांफते हुए उनके पीछे भागे, और हनुमानजी खिलखिलाते रहे।

जल्द ही पहरेदार हनुमानजी को रावण के भव्य महल में ले आए। राजा बड़े सिंहासन पर बैठा था, पर उसने हनुमानजी को आसन नहीं दिया। हनुमानजी को ज़रा भी बुरा नहीं लगा। उन्होंने अपनी जादुई पूँछ को लंबा करना शुरू किया। पूँछ को गोल-गोल लपेटकर ऊँचा आसन बनाया, और ऊपर बैठ गए। हनुमानजी राजा से भी ऊपर जा बैठे। पूरी सभा यह देखकर मुस्कुरा उठी!

पहरेदार हनुमानजी को डराना चाहते थे। उन्होंने उनकी पूँछ पर कपड़ा लपेटा और आग लगा दी। पर हनुमानजी तो बस मुस्कुराए। वे सिकुड़कर एक बटन जितने छोटे हो गए और झटपट छूट गए। फिर हनुमानजी तारों भरे आसमान में उछल पड़े! वे सोने की छतों पर मज़े से कूदने लगे। उनकी पूँछ दीवाली के सुंदर दीये जैसी चमकने लगी। नीचे सुरक्षित खड़े सभी लोग खुशी से यह देखने लगे।

हनुमानजी नीले समुद्र की ओर उतरे और पूँछ ठंडे पानी में डुबो दी। छपाक की आवाज़ आई, और आग तुरंत बुझ गई। उनकी पूँछ फिर से एकदम ताज़ा हो गई। उन्होंने बाहें फैलाईं और सुहावने आकाश में उड़ान भरी। हनुमानजी रास्ते भर खिलखिलाते हुए चले। वे राजकुमार राम को यह मज़ेदार कहानी सुनाने को उत्सुक थे!

सच्ची वीरता चतुरता, मज़ेदार सूझ-बूझ और दयालु दिल से ही चमकती है।

इस कहानी के बारे में

स्रोतः: रामायण की एक कहानी

hanuman उम्र 5-7

बंदना

ॐ हनुमते नमो नमः
om hanumate namo namah

EnglishO Hanuman, brave heart and devoted friend of Rama — we bow to you again and again.

नेपालीहे हनुमान — हामी तपाईंलाई बारम्बार नमस्कार गर्छौं।

हिन्दीहे हनुमान — हम आपको बार-बार नमस्कार करते हैं।

श्लोक

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् । वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥
manojavaṃ mārutatulyavegaṃ jitendriyaṃ buddhimatāṃ variṣṭham, vātātmajaṃ vānarayūthamukhyaṃ śrīrāmadūtaṃ śaraṇaṃ prapadye
मन जैसे वेगवान, वायु के समान तेज़, अपनी इंद्रियों को जीतने वाले, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ; पवनपुत्र, वानरों के मुखिया, श्रीराम के दूत — मैं उनकी शरण लेता हूँ।
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