ब्रह्मचारिणी और माला के मनके

पार्वती की एक बहुत बड़ी इच्छा थी, और वे एक-एक मनका करके उसकी ओर बढ़ीं।

उम्र 5-7

पर्वत की बेटी पार्वती की एक बहुत बड़ी इच्छा थी। वे सबसे ऊँची चोटी पर अकेले रहने वाले महायोगी शिव से विवाह करना चाहती थीं। "यह आसान नहीं होगा," लोगों ने कहा। पार्वती बस मुस्कुरा दीं।

उन्होंने रेशमी साड़ियाँ और गहने रख दिए। सादी सफ़ेद साड़ी पहनी, और लकड़ी के मनकों की माला और छोटा कमंडल लिया। नंगे पाँव वे जंगल की ओर चल पड़ीं। अब लोग उन्हें ब्रह्मचारिणी कहने लगे, यानी साधना के मार्ग पर चलने वाली।

हर दिन वे एक ऊँचे पेड़ के नीचे बैठकर प्रार्थना करतीं। हर प्रार्थना के साथ वे माला का एक मनका आगे सरकातीं। टक। बस एक। अगले दिन फिर, टक, एक और। एक मनका ज़्यादा नहीं लगता। पर मनके जुड़ते जाते हैं।

किसी दिन मूसलाधार बारिश हुई। किसी दिन ठंडी हवा चली। पार्वती ने हार नहीं मानी। उन्होंने भीगी हुई एक छोटी चिड़िया को अपनी छाँव में जगह दी, और आगे बढ़ती रहीं, एक मनका, फिर एक और।

जानवर उनसे प्यार करने लगे। हिरण उनके पास आकर लेट जाते। मोर पास ही नाचते। पूरा जंगल उनके आसपास शांत हो गया। उनका मन मनका-मनका करके मज़बूत हो रहा था।

नवरात्रि के दूसरे दिन हम ब्रह्मचारिणी को याद करते हैं। क्या तुम भी कुछ मुश्किल सीख रहे हो, जैसे पढ़ना, या साइकिल चलाना? हर दिन थोड़ी कोशिश करो, जैसे एक मनका सरकाना। एक दिन पीछे मुड़कर देखोगे, तो पाओगे कि तुम कितना आगे आ गए हो।

बड़े सपने छोटे-छोटे कदमों से पूरे होते हैं। हर दिन थोड़ा-थोड़ा करके आगे बढ़ते रहो।

इस कहानी के बारे में

स्रोतः: नवदुर्गा परंपरा (नवरात्रि का दूसरा दिन): हाथ में जपमाला और कमंडल लिए नंगे पाँव चलकर लंबी, निरंतर तपस्या शुरू करने वाली पार्वती का ब्रह्मचारिणी रूप। बच्चों के लिए कोमल पुनर्कथन।

parvati उम्र 5-7

बंदना

ॐ पार्वत्यै नमो नमः
om parvatyai namo namah

EnglishO Parvati, daughter of the mountain, mother of Ganesha — we bow to you again and again.

नेपालीहे पार्वती — हामी तपाईंलाई बारम्बार नमस्कार गर्छौं।

हिन्दीहे पार्वती — हम आपको बार-बार नमस्कार करते हैं।

श्लोक

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
sarvamaṅgalamāṅgalye śive sarvārthasādhike, śaraṇye tryambake gauri nārāyaṇi namo'stu te
सब मंगलों की मंगल, सब प्रयोजन सिद्ध करने वाली कल्याणी, शरण देने वाली, त्रिनेत्रा गौरी — आपको नमस्कार।
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