लक्ष्मी और मिट्टी का दीया
एक छोटा दीया, एक अँधेरी गली — और रोशनी बाँटने पर उसका क्या होता है।
वह दीयों की रात थी। लक्ष्मी ने आकाश से नीचे देखा। उन्हें यह रात सबसे प्यारी लगती थी। पर एक छोटी गली अँधेरी थी। एक भी दीया नहीं। एक भी रोशनी नहीं।
उसी गली में आशा नाम की एक लड़की रहती थी। आशा के पास एक मिट्टी का दीया था। बस एक। उसने उसे जलाया और अपनी देहरी पर रख दिया। उससे रोशनी का एक छोटा गरम घेरा बन गया।
पड़ोस में बूढ़ी नानी के पास कोई रोशनी नहीं थी। आशा ने अपने इकलौते छोटे दीये को देखा। "आइए," उसने कहा। उसने अपनी लौ नानी के दीये से छुआ दी। अब दो रोशनियाँ थीं। और आशा का दीया पहले जितना ही चमकीला था।
नानी ने अपनी रोशनी पड़ोस के लड़के को दी। लड़के ने अपनी रोशनी नानबाई को दी। नानबाई ने अपनी कुम्हार को दी। रोशनी, और रोशनी, और और रोशनी — पूरी गली भर।
लक्ष्मी देखने नीचे आईं। वे गरम और जगमगाती गली में चलीं। हर दरवाज़े पर वे मुस्कुराईं। "रोशनी बाँटने से छोटी नहीं होती," उन्होंने कहा। "वह तो बस और फैल जाती है।"
बाँटने से रोशनी छोटी नहीं होती। वह बस और फैल जाती है।
इस कहानी के बारे में
बालकथा की मौलिक कहानी।
बंदना
EnglishO Mahalakshmi, goddess of fortune and light — we bow to you again and again.
नेपालीहे महालक्ष्मी — हामी तपाईंलाई बारम्बार नमस्कार गर्छौं।
हिन्दीहे महालक्ष्मी — हम आपको बार-बार नमस्कार करते हैं।