दुर्गा और भैंसा दानव

महिष नाम का एक ज़िद्दी दादा सबको उनके घरों से भगा देता था, तब सभी देवताओं ने अपनी रोशनी मिलाई, और सुनहरे शेर पर सवार माँ दुर्गा प्रकट हुईं।

उम्र 5-7

बहुत, बहुत पहले महिष नाम का एक बड़ा, गुस्सैल दादा रहता था। वो भैंसे जैसा ज़िद्दी था। वो गाँव-गाँव धम-धम करता घूमता और चिल्लाता, "भागो यहाँ से! ये सब मेरा है!" सब लोग अपने घर छोड़कर भाग गए, और मुर्गियाँ भी फड़फड़ाकर उड़ गईं।

आसमान के देवता भी परेशान हो गए। वे रुई जैसे सफ़ेद बादलों के पीछे से झाँकने लगे। "वो किसी की बात नहीं सुनता," उन्होंने धीरे से कहा। "अब क्या करें?"

फिर देवताओं को एक उपाय सूझा। हर देवता के भीतर एक ख़ास रोशनी थी, लाल और नीली, सुनहरी और सफ़ेद। वे घेरा बनाकर खड़े हुए और सबने अपनी-अपनी रोशनी एक साथ मिला दी। सारी रोशनियाँ घूमते-घूमते एक बड़ी, चमकती ज्योति बन गईं।

उसी ज्योति से बड़े सुनहरे शेर पर सवार माँ दुर्गा प्रकट हुईं। उनकी आँखें दयालु थीं, चेहरे पर शांत मुस्कान थी, और उनके आठ कोमल हाथों में कमल, शंख और एक छोटी-सी घंटी थी। "डरो मत," उन्होंने प्यार से कहा। "हम सब साथ खड़े रहेंगे।"

नौ दिन तक महिष फुफकारता रहा, चिल्लाता रहा, धमकाता रहा। पर दुर्गा बिलकुल नहीं डरीं। वे शांत और हिम्मत से डटी रहीं। दसवें दिन महिष एक लंबी, रूठी हुई साँस लेकर एक पत्थर पर बैठ गया, और उसकी दादागिरी ख़त्म हो गई। सब लोग ख़ुशी-ख़ुशी अपने घर लौट आए।

वो दसवाँ दिन जीत की ख़ुशी का दिन है, विजयादशमी। भारत में ये दशहरा है, जब आतिशबाज़ी होती है और रावण दहन होता है। नेपाल में ये दशैं है, जब बड़े-बुज़ुर्ग लाल टीका और हरा जमरा लगाते हैं, बच्चे बाँस के झूले पर ऊँचे-ऊँचे झूलते हैं और आसमान पतंगों से भर जाता है। जब सब मिलकर अच्छाई के लिए खड़े होते हैं, कोई दादा बड़ा नहीं रहता।

जब सब मिलकर अच्छाई के लिए खड़े होते हैं, कोई दादा बड़ा नहीं रहता।

इस कहानी के बारे में

बालकथा की मौलिक कहानी।

durga उम्र 5-7

बंदना

ॐ दुं दुर्गायै नमो नमः
om dum durgayai namo namah

EnglishO Durga, strong mother who guards us from harm — we bow to you again and again.

नेपालीहे दुर्गा — हामी तपाईंलाई बारम्बार नमस्कार गर्छौं।

हिन्दीहे दुर्गा — हम आपको बार-बार नमस्कार करते हैं।

श्लोक

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥
yā devī sarvabhūteṣu śaktirūpeṇa saṃsthitā, namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ
जो देवी हर प्राणी में शक्ति के रूप में विराजती हैं — उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें बार-बार नमस्कार।
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