आशा और आशीर्वाद का टीका

आशा ने विजयादशमी पर दादा-दादी से लाल टीका और आशीर्वाद पाया, और परिवार का प्यार सबसे बड़ा उपहार बन गया।

उम्र 5-7

नवरात्रि के पहले दिन आशा ने दादी से पूछा, "दादी, विजयादशमी पर हम टीका क्यों लगाते हैं?" दादी मुस्कुराईं। "टीका बड़ों का आशीर्वाद है, बेटा। उसके साथ हम जमरा भी सजाते हैं। आओ, थाली में जौ के बीज बोएँ।"

हर सुबह आशा थाली में थोड़ा पानी छिड़कती और उसे मुलायम कपड़े से ढक देती। वह रोज़ दिन गिनती, "अब टीके में कितने दिन बाकी हैं?" "धीरज रखो," दादी ने कहा। "अच्छी चीज़ें चुपचाप बढ़ती हैं।"

नौवें दिन की सुबह आशा ने कपड़ा उठाया और हैरान रह गई। थाली में छोटे, मुलायम, सुनहरे अंकुर उग आए थे, धूप की किरणों जैसे चमकीले! "जमरा तैयार है!" वह खुशी से चिल्लाई। "कल तो टीके का दिन है!"

दसवें दिन, विजयादशमी पर, पूरा घर साफ़ और चमकता हुआ था। सबने नए कपड़े पहने थे। माँ ने चावल, दही और लाल रंग मिलाकर मुलायम टीका तैयार किया। चाचा, चाची और भाई-बहन दूर-दूर से आए, और पूरा घर हँसी से गूँज उठा।

आशा दादा-दादी के सामने बैठी। दादी ने उसके माथे पर लाल टीका लगाया और कुछ सुनहरे जमरा उसके बालों में सजा दिए। "तुम खुश रहो, स्वस्थ रहो और दयालु बनो," उन्होंने कहा। आशा ने झुककर उनके पैर छुए, और दादा ने मुस्कुराकर उसे एक छोटा-सा उपहार दिया।

फिर आशा ने परिवार में सबको एक-एक करके जमरा दिया। सब गुनगुनी धूप वाले बरामदे में बैठकर मीठी सेल रोटी खाने लगे। आशा ने जाना कि टीका सिर्फ़ एक लाल निशान नहीं, बड़ों का प्यार है। विजयादशमी पर हम याद करते हैं कि अच्छाई की जीत होती है, और परिवार हर दिन को रोशन कर देता है।

बड़ों का आशीर्वाद और परिवार का प्यार सबसे बड़ा उपहार है।

इस कहानी के बारे में

स्रोतः: नेपाल की दशैं परंपरा से प्रेरित: नवरात्रि के पहले दिन बोए गए और अँधेरे में उगाए गए जमरा (जौ के जवारे), और दसवें दिन विजयादशमी पर लाल टीके के साथ बड़ों का आशीर्वाद। आशा और उसके परिवार की कथा एक मौलिक, कोमल पारिवारिक कथा है।

durga उम्र 5-7

बंदना

ॐ दुं दुर्गायै नमो नमः
om dum durgayai namo namah

EnglishO Durga, strong mother who guards us from harm — we bow to you again and again.

नेपालीहे दुर्गा — हामी तपाईंलाई बारम्बार नमस्कार गर्छौं।

हिन्दीहे दुर्गा — हम आपको बार-बार नमस्कार करते हैं।

श्लोक

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥
yā devī sarvabhūteṣu śaktirūpeṇa saṃsthitā, namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ
जो देवी हर प्राणी में शक्ति के रूप में विराजती हैं — उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें बार-बार नमस्कार।
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