नंदी और मन की इच्छा
जब भगवान शिव गहरे ध्यान में लीन हो जाते हैं, तब प्यारे नंदी महाराज एक नन्हीं गिलहरी की खास बात को बड़े ध्यान से सुनते हैं और उसे अपने दिल में संभालकर रखते हैं।
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बर्फ से ढके ऊंचे कैलाश पर्वत पर दुनिया के सबसे प्यारे नंदी महाराज रहते थे। नंदी को अपने गले में पीतल की चमकदार घंटी पहनना बहुत पसंद था, जो उनके चलने पर 'छुन-छुन' बजती थी। सबसे ज़्यादा उन्हें अपने प्यारे प्रभु भगवान शिव के पास बैठना और चारों ओर शांति बनाए रखना पसंद था।
एक सुहानी सुबह, भगवान शिव गहरे ध्यान में बैठ गए। नंदी भी बिल्कुल उनके पास, नदी के शांत पत्थर की तरह चुपचाप बैठ गए। उन्होंने मन ही मन वादा किया कि वे पूरे ध्यान से बैठेंगे ताकि उनके प्रभु के ध्यान में कोई रुकावट न आए।
तभी एक नन्हीं गिलहरी छोटा सा बीज लिए फुदकती हुई ऊपर आई। वह भगवान शिव से मदद माँगना चाहती थी, लेकिन उसने देखा कि प्रभु तो ध्यान में हैं। नंदी ने प्यार से मुस्कुराकर धीरे से कहा, 'छोटी दोस्त, तुम अपनी इच्छा मुझे बता सकती हो। मैं तुम्हारी बात बहुत ध्यान से सुनूँगा।'
गिलहरी ने नंदी के कोमल कान के पास जाकर अपनी गुप्त इच्छा फुसफुसाई। नंदी ने बिना हिले-डुले बड़े धैर्य से उसकी एक-एक बात सुनी। उन्होंने उस प्यारी बात को अपने दिल की तिजोरी में सुरक्षित रख लिया और इंतज़ार करने लगे।
जब भगवान शिव ने अपनी आँखें खोलीं, तो नंदी ने ख़ुशी-ख़ुशी गिलहरी की इच्छा प्रभु तक पहुँचा दी। शिवजी बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने तुरंत वह इच्छा पूरी कर दी! उन्होंने नंदी के सिर पर प्यार से हाथ फेरा और उनके शांत मन व धैर्य की प्रशंसा की।
धैर्य और एकाग्रता से सुनकर हम एक अच्छे श्रोता और सच्चे मित्र बन सकते हैं।
इस कहानी के बारे में
स्रोतः: शिव पुराण की पौराणिक कथाओं पर आधारित
बंदना
EnglishO Nandi, patient and faithful guardian — we bow to you again and again.
नेपालीहे नन्दी, धैर्यवान र निष्ठावान रक्षक — हामी तपाईंलाई बारम्बार नमस्कार गर्छौं।
हिन्दीहे नंदी, धैर्यवान और निष्ठावान रक्षक — हम आपको बार-बार नमस्कार करते हैं।