नन्हे कृष्ण और मुट्ठी भर अनाज

जब नन्हे कृष्ण मुट्ठी भर अनाज से मीठे फल खरीदने की कोशिश करते हैं, तो उनका सच्चा प्रेम एक छोटे से सौदे को एक अद्भुत चमत्कार में बदल देता है।

उम्र 5-7

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वृंदावन की धूप खिली गलियों में, एक दयालु फल बेचने वाली आ रही थी। 'मीठे-मीठे जामुन! रसीले आम ले लो!' वह प्यार से आवाज़ लगा रही थी। नन्हे कृष्ण ने उसकी आवाज़ सुनी और दौड़कर द्वार पर आ गए। उनके छोटे से पेट में चूहे कूद रहे थे और उनका मन उन रंग-बिरंगे, रसीले फलों को खाने के लिए ललचा उठा।

कान्हा जानते थे कि बड़े लोग चीज़ें खरीदने के लिए अनाज देते हैं। वे झट से घर के अंदर भागे और मिट्टी के एक बड़े मटके में हाथ डाला। उन्होंने अपनी छोटी-छोटी हथेलियों को मिलाकर जितना हो सके, उतना सुनहरा अनाज भर लिया। अपनी पहली खरीदारी के लिए वे बहुत उत्साहित थे!

नन्हे कृष्ण अपने छोटे-छोटे कदमों से जितना तेज़ भाग सकते थे, गली की ओर भागे। लेकिन अरे यह क्या! उनकी नन्हीं गोल-मटोल उंगलियों के बीच से अनाज फिसलने लगा। टिप-टिप! दाने धूल भरे रास्ते पर गिरते गए। जब वे फल वाली के पास पहुँचे, तो उनकी मुट्ठी में बस थोड़े से ही दाने बचे थे।

कृष्ण ने अपनी प्यारी सी मुस्कान के साथ बची हुई मुट्ठी आगे बढ़ा दी। फल वाली ने उस नन्हें बालक को देखा और उसका दिल खुशी से भर आया। उसे गिरे हुए अनाज की बिल्कुल परवाह नहीं थी। उसने खुशी-खुशी कान्हा की नन्हीं हथेलियों को अपने सबसे मीठे और पके फलों से भर दिया।

नन्हे कान्हा खिलखिलाते हुए अपने मीठे फल खाते-खाते आगे बढ़ गए। जब फल वाली ने अपनी टोकरी में नीचे देखा, तो वह हैरान रह गई! उसकी टोकरी के सारे बचे हुए फल चमकते हुए रत्नों और सोने के सिक्कों में बदल गए थे। उसने सच्चे मन और प्यार से दिया था, और कृष्ण ने उसे सदा के लिए अपना आशीर्वाद दे दिया था।

जब हम सच्चे मन और प्यार से कुछ बाँटते हैं, तो कोई भी उपहार कभी छोटा नहीं होता।

इस कहानी के बारे में

स्रोतः: श्रीमद्भागवतम की एक कथा पर आधारित

krishna उम्र 5-7

बंदना

हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे । हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे ॥
hare krishna hare krishna, krishna krishna hare hare, hare rama hare rama, rama rama hare hare

EnglishO Krishna, O Rama — we call your sweet names again and again.

नेपालीहे कृष्ण, हे राम — हामी तपाईंका मीठा नाम पटक-पटक जप्छौं।

हिन्दीहे कृष्ण, हे राम — हम आपके मधुर नाम बार-बार जपते हैं।

श्लोक

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने । प्रणतक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः ॥
kṛṣṇāya vāsudevāya haraye paramātmane, praṇatakleśanāśāya govindāya namo namaḥ
वसुदेव के पुत्र कृष्ण को, हरि को, परमात्मा को, शरण में आने वालों के दुःख हरने वाले को — गोविंद को बार-बार नमस्कार।