राजा इंद्र और सतरंगी पुल

जब प्यासे जंगल को पानी की ज़रूरत होती है, तब राजा इंद्र सीखते हैं कि असली जादू शक्ति में नहीं, बल्कि प्यार और प्रकृति के प्रति दया में छुपा होता है।

उम्र 5-7

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सुनहरे बादलों के बहुत ऊपर, दयालु राजा इंद्र ने धरती के सुंदर जंगल की ओर देखा। घने पेड़ प्यासे थे और नन्हे-मुन्ने जानवर ठंडे पानी की तलाश कर रहे थे। इंद्र ने प्यार से मुस्कुराते हुए अपने सफेद हाथी, ऐरावत, की पीठ सहलाई। इंद्र ने धीरे से कहा, "अब धरती के दोस्तों के लिए पानी का एक प्यारा सा उपहार भेजने का समय आ गया है।"

इंद्र ने अपना भव्य सुनहरा धनुष उठाया और काले-काले बादलों को बुलाया। तभी आसमान में ज़ोर से बिजली कड़की! एक छोटा खरगोश डरकर अपने कान ढकने लगा और एक नन्हीं चिड़िया घबरा गई। इंद्र रुक गए। उन्होंने देखा कि उनके तूफ़ान ने बेचारे जानवरों को डरा दिया है। इंद्र ने सोचा, "ओह! मुझे अपनी शक्ति का इस्तेमाल बहुत प्यार और संभालकर करना चाहिए।"

इंद्र ने बादलों को एक मीठी सी लोरी सुनाई और उनसे प्यार से बरसने को कहा। भारी तूफ़ान की जगह, पानी की ठंडी-ठंडी बूँदें छम-छम करके पत्तियों पर नाचने लगीं। प्यासे लाल फूल खिल उठे और हरी-हरी घास चमकने लगी। नन्हा खरगोश खुशी से उछल-कूद करने लगा और खिलखिला उठा!

जंगल में फिर से धूप खिलाने के लिए, इंद्र ने सूरज की सात रंगीन किरणें इकट्ठी कीं। उन्होंने आसमान में लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, जामुनी और बैंगनी रंगों का एक सुंदर धनुष बना दिया! यह सतरंगी इंद्रधनुषी पुल स्वर्ग से धरती तक फैल गया। इंद्र ने वादा किया कि वे हमेशा इस प्यारे जंगल का ख्याल रखेंगे।

जंगल के सभी जानवर उस सुंदर इंद्रधनुष के नीचे इकट्ठे हुए और राजा इंद्र को धन्यवाद देने लगे। इंद्र ने अपने बादल से मुस्कुराते हुए हाथ हिलाया। उनका दिल खुशी से भर गया था। वह प्यारा जंगल आसमान के दुलार में हमेशा के लिए खिलखिलाने लगा।

सच्ची ताकत दूसरों पर दया दिखाने और प्रकृति के साथ प्यार से रहने में है।

इस कहानी के बारे में

स्रोतः: वैदिक पौराणिक कथाओं और भारतीय परंपरा से

indra उम्र 5-7

बंदना

ॐ इन्द्राय नमो नमः
om indraya namo namah

EnglishO Indra, king of the gods, rider of the rain clouds — we bow to you again and again.

नेपालीहे इन्द्र — हामी तपाईंलाई बारम्बार नमस्कार गर्छौं।

हिन्दीहे इन्द्र — हम आपको बार-बार नमस्कार करते हैं।

श्लोक

ॐ सहस्रनेत्राय विद्महे वज्रहस्ताय धीमहि । तन्नो इन्द्रः प्रचोदयात् ॥
oṃ sahasranetrāya vidmahe vajrahastāya dhīmahi, tanno indraḥ pracodayāt
सहस्र नेत्रों वाले का हम ध्यान करते हैं, वज्रधारी को मन में धारण करते हैं; इंद्र हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।